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Vice Principal's Message

उपाचार्य की कलम से

प्राचीन भारतीय विद्वानों के अनुसार व्यक्ति के संस्कार ही उसके शिक्षित होने का सर्वप्रमुख प्रमाण हैं। वर्तमान आधुनिक युग उस व्यक्ति को अधिक शिक्षित मानता है जिसके अंक अधिक होते हैं या जिसके पास अधिक से अधिक डिग्रियाँ होती हैं। प्रश्न यह है कि किस दृष्टिकोण को संगत माना जाए। आधुनिक युग की शिक्षा भलें ही जीविकोपार्जन केन्द्रित मानी गई हो, लेकिन यह सर्वविदित है कि आज के युग में अपनी शिक्षा के आधार पर जीवन यापन करने वाले मात्र 10-12 प्रतिशत लोग ही हैं। अधिकतर लोगों के जीवन यापन के साधनों का उनकी शिक्षा से कोई संबंध नहीं होता है अर्थात ‘पढ़ाई और कमाई’ का कोई विशेष संबंध नहीं है। अर्थ प्राप्ति एक कौशल है जो अनुभव और सूक्ष्म दृष्टि से प्राप्त होता है। स्पष्ट है कि आज की शिक्षा न तो जीविकोपार्जन सिखाती है और न ही संस्कार प्रदान करती है; इसलिए हम ‘लियो कॉलेज’ में पाठ्यक्रम आधारित शिक्षा के साथ-साथ संस्कारों के उन्नयन का भी प्रयत्न करते हैं।

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Shailesh Kumar Pathak

NET, SET, M.Phil., Ph.D ®, MA, B.Ed., Ph.D (Running)